मंगलसर बांध – सरिस्का टाइगर रिज़र्व

किसी पूर्व योजना के बिना हम जयपुर से अलवर जिले में स्थित टहला के निकट नीलकंठ महादेव के प्राचीन मंदिरों के तलाश में आए हैं। भानगढ़-टहला मार्ग पर टहला से 2 किलोमीटर पहले, बाएं तरफ नीलकंठ की और एक सड़क जाती हैं। इस संकरी सड़क पर चढ़ते ही, एक तरफ हरे भरे सरसों-गेहूं-चने के खेतों के बीच से निकल रही कार से सुहाने दृश्य नजर आने लगते हैं। खेतों में बनी मचान को देखकर गांव में बचपन की मधुर यादें ताज़ा हो जाती हैं। लोग जंगली जानवरों से सुरक्षावश खेतों में मचान बना लेते हैं साथ ही यहाँ बैठकर आवारा पशुओं से फसल की सुरक्षा भी करते हैं।

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वही सड़क के और दूसरी मंगलसर बाँध की दीवार समानान्तर चलती हैं। कोतुहलवश बाँध की ऊँची और लम्बी दीवार को देखकर हमने कार की रफ़्तार पर ब्रेक लगा ही लिया और जैसे ही पाल के ऊपर पहुंचे मंगलसर का विशाल कैचमेंट नजर आने लगता हैं।

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मंगलसर, सरिस्का टाइगर रिज़र्व की दक्षिणी सीमा पर स्थित हैं। इस बाँध का निर्माण वर्षा-जल संचयन और कृषि सिंचाई के लिए किया गया था। लेकिन पिछले सालों में हुई कम वर्षा की वजह से बांध खाली होने लगा है। हालांकि इसकी भराव क्षमता 27 फीट हैं।

जल स्तर काफी कम होने के बावजूद भी वहां अनेक प्रकार के प्रवासी पक्षी मौजूद थे जिनको देखकर हमारी ख़ुशी का ठिकाना न रहा। तभी बिना किसी विलम्ब के मैंने झटपट कैमरा निकाला और उन पक्षियों को अपने कैमरे में कैद करने की कोशिश में जुट गया।

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वहा एक सारस क्रेन पक्षी का जोड़ा भी विचरण कर रहा था कई सालों बाद यूं सारस को खुले में विचरण करते हुए देखा था।

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सर्दियां प्रारम्भ होने के साथ ही विदेशी पक्षी भारत की ओर आगमन करना शुरू कर देते हैं। दरअसल सूर्य के दक्षिणायन होने पर उतरी ध्रुव वाले हिस्से में शीत ऋतु शुरू हो जाती हैं। पक्षी बर्फ़बारी से बचने और प्रजनन के लिए उत्तर (यूरोप, साइबेरिया, रूस, जापान, अन्य देशों) से दक्षिण का सफ़र तय करते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार पक्षियों के दिमाग में बायोलॉजिकल कम्पास काम करता है जिसकी वजह से इन्हें रास्ते भलीभांति याद रहते हैं। और इनकी सीखने की आदत भी इन्हें इतना दूर तक ले आती है। ये जगह प्रवासी पक्षियों के लिए पसंदीदा रमणीय स्थान रही है।

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मुख्यतः सारस क्रेन, ओरिएण्टल वाइट इबिस, स्पॉटेड अवोकेट, ब्लैक विंग्ड स्टिल्ट, लार्ज इग्रेट, बार हेडेड गूज, कॉमन टील, पाइड अवोकेट व मार्श सैंडपाइपर आदि प्रजातियाँ देखने को मिली।

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स्थानीय लोगों के अनुसार मंगलसर बांध पर पहले की अपेक्षा अब परिंदों की संख्या कम ही नजर आती है। इसका मुख्य कारण है मानवीय दखल (मछली पालन के रूप में)। जिसके कारण यहाँ वर्षो से बड़ी संख्या में आ रहे पर्यटकों को काफी निराशा होती है।

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इंडियन पोंड टर्टल (कछुए) धूप सेंकने के लिए सूखे जगह पर घूमते नजर आए। इसी दौरान हमने देखा कि एक जंगली कुत्ता झाड़ियो की तरफ काफी देर से नजर गड़ाए खड़ा था, हमें कुछ सही नहीं लगा और वास्तविक स्तिथि जानने के उद्देश्य से झाड़ियों की तरफ हमारे कदम अपने आप बड़ते चले गए। वहा जाकर हमने देखा की एक कछुआ जो काफी डरा हुआ था कुत्ते के भय से उन झाड़ियों में छुप कर अपनी जान बचाने की कोशिश कर रहा था। मगर यहाँ उसका बच पाना मुश्किल था इसलिए हमने उसे वहा से उठाकर पानी में छोड़ दिया जिससे शायद उसे रहत की सांस मिली होगी।

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बार हेडेड गूज का एक समूह अपनी ही धुन में अठखेलियां कर रहा था।

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अंत में कुछ और फ़ोटो:-

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सारस क्रेन इस बांध के जैसे सिक्यूरिटी गार्ड की तरह नजर आते हैं , उनके इर्दगिर्द छोटे पक्षी किसी स्नेह-मिलन समारोह में बतिया रहे हैं।

“पक्षियों का भी एक अलग ही जहां होता हैं,

जमीं तो नही उनकी मगर आसमान सारा होता हैं।”

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बांध में मानवीय अतिक्रमण

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मंगलसर किस तरह पहुँचा जाए?

जयपुर से 109 किलोमीटर हैं, जयपुर – दौसा-गोला का बास-टहला मार्ग लिया जा सकता हैं। पब्लिक वाहन से पहुँचना थोड़ा समय लेने वाला कार्य हैं। कार या बाइक से आसानी से पहुँचा जा सकता हैं। जयपुर-दिल्ली रेलवे लाइन स्थित निकटतम रेलवे स्टेशन राजगढ़ 29 किमी दूर हैं. अलवर – मंगलसर बाँध के बीच दूरी 65 किमी हैं.

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मंगलसर घूमने का सही समय?

जुलाई-अगस्त बरसात के समय चारों और खूबसूरत हरियाली मन-मोहक होती हैं और नवंबर-फरवरी पक्षी प्रेमियों लिए यह स्वर्ग हैं।

अन्य समीपवर्ती आकर्षक स्थल?

भानगढ़-अजबगढ़, कांकवाड़ी का किला और निकटवर्ती गांव, नीलकंठ महादेव प्राचीन मंदिर और जैन मंदिर, सरिस्का टाइगर रिज़र्व, टहला फ़ोर्ट।

टिप्स एवं आवश्यक वस्तुएँ?

अगर आप प्रकृति-प्रेमी हैं तो आधा दिन का समय बनता हैं। बरसात के समय बोटिंग भी की जा सकती हैं। पक्षी-प्रेमियों के लिए बाइनाकुलर व कैमरा आवश्यक हैं। फिशिंग रॉड से मछलियाँ पकड़ कर आप यहां पका सकते हैं। कुल मिलाकर यह आधा दिन की बहुत अच्छी पिकनिक हैं।

स्वच्छ भारत अभियान?

जगह साफ-स्वच्छ हैं। किसी भी तरह का कचरा न फैलाये ताकि आप जब अगली बार आये तो उतना ही आनंद ले सके।☺ कृपया कचरा पैक करके वापस अपने साथ ले जाये।

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