बालपकरम नेशनल पार्क, मेघालय

बालपकरम नेशनल पार्क, मेघालय राज्य के साउथ गारो हिल जिले में स्थित है। यह जैव विविधता का महत्वपूर्ण केंद्र है तथा नोकरेक बायोस्फियर रिजर्व का हिस्सा है। इसे गारो मान्यताओं व परम्पराओं में पवित्र स्थान माना गया है। प्रस्तुत है मार्च, 2018 के मेघालय भ्रमण के कुछ पन्ने।

बाघमारा – अभावों के बीच सुंदर दुनिया

मार्च 8, 2018 साउथ गारो हिल जिला, मेघालय सिजु गुफा और पक्षी अभ्यारण्य का एपिसोड पूरा हो गया। मैंने अविस्मरणीय यादों के साथ 11.15 बजे सिजु को अलविदा कह दिया। गारो हिल में मिले प्यार ने मुझे कई बार भावुक बना दिया। जहां से भी रवाना होता तो लोग जरूर पूछते, " वापस कब आओगे?"… Continue reading बाघमारा – अभावों के बीच सुंदर दुनिया

सिजु गुफा, मेघालय

साउथ गारो हिल जिला, मेघालय  08 मार्च, 2018 सिजु गुफा जिसे स्थानीय लोग 'डोबाखोल ' के नाम से जानते हैं, राष्ट्रीय राजमार्ग 217 से 5 कि॰मी॰ दूर, अपर सिजु और लोअर सिजु गाँव  के बीच, सोमेश्वरी नदी के तट पर स्थित है। डोबाखोल का गारो भाषा में अर्थ है- चमगादड़ों की गुफा। मुख्य मार्ग (एन॰एच॰ 217)… Continue reading सिजु गुफा, मेघालय

सिजु पक्षी अभ्यारण्य – मेघालय

साउथ गारो हिल जिला, मेघालय8 मार्च, 2018  सुबह की आहट पाकर पक्षियों की चहचहाहट शुरू हो गई थी, इसी से मेरी नींद टूट गई। मैं गेस्ट हाउस के कमरे से बाहर निकल कर बेंच पर बैठ गया। मेरे एक तरफ जंगल है और दूसरी तरफ सोमेश्वरी नदी बह रही है। आधुनिक शोर-शराबे से दूर प्रकृति… Continue reading सिजु पक्षी अभ्यारण्य – मेघालय

नोकरेक से सिजु की यात्रा

नोकरेक नेशनल पार्क (दरिबोकगरे) से मार्च की इस दोपहरी में मेघालय यात्रा के अगले पड़ाव सिजु के लिए रवाना हो गया। दरिबोकगरे संपर्क सड़क ओरगिटोक में तुरा-विलियम नगर मार्ग के जुड़ जाती है। ओरगिटोक से आगे यह मार्ग सिमसांग नदी के साथ-साथ चलता है। सिमसांग का उद्गम  नोकरेक की पहाड़ियों से हैं। सिमसांग खूबसूरत घूमावदार… Continue reading नोकरेक से सिजु की यात्रा

शिलांग से तुरा की यात्रा

        मैं गुवाहाटी से शिलांग 04 मार्च, 2018 को पंहुचा था। वहां से अगले दिन मावफलांग पहुँचा। मावफलांग से मधुर यादों के साथ 06 मार्च, 2018 की दोपहर में नोकरेक नेशनल पार्क के लिए रवाना हो गया। मावफलांग से चार किलोमीटर चलने पर मावंलाप गाँव आता है, यही से शिलांग से नोंगस्टोइन को जोड़ने वाला  NH-106 मिलता है।… Continue reading शिलांग से तुरा की यात्रा

चौंसठ योगिनी मंदिर, मुरैना और संसद भवन

बचपन से आपने चम्बल के डकैतों के क़िस्से-कहानियां ज़रूर सुने होंगे। चम्बल नदी ने दुर्गम बीहड़ों का निर्माण किया, और इसी दुर्गमता ने डकैतों को पनपने के लिये उपजाऊ ज़मीन दी। लेकिन 1990 के दशक के अंत तक हालात बदल गए। एक तरफ सड़कों का जाल बिछाया गया, दूसरी तरफ कानून व्यवस्था में किये सुधारों… Continue reading चौंसठ योगिनी मंदिर, मुरैना और संसद भवन